प्रदर्शन पर नकेल कसी

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शिमला | हिमाचल सरकार ने कर्मचारियों के धरना-प्रदर्शन पर नकेल कस दी है। इसे संदर्भ में कार्मिक विभाग ने शुक्रवार को आदेश जारी किए है। इसमें कहा गया है कि जो कर्मचारी धरने में शामिल होंगे, उनका वेतन काटा जाएगा। धरने के दौरान गैर-कानूनी गतिविधि पथराव, तोड़-फोड़ वगैरह करने पर निलंबन भी किया जाएगा। कार्मिक विभाग ने सभी विभागाध्यक्ष को इन आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित बनाने को कहा है। राज्य में अब यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री पहले ही कर्मचारियों को दो टूक धरना-प्रदर्शन न करने की नसीहत दे चुके हैं। इसके बाद सदन के भीतर नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को तानाशाह तक कह डाला है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए इस मामले को बेवजह तूल देने का आरोप लगाया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि धरना-प्रदर्शन कर्मचारियों के हित में नहीं है। जिस किसी ने भी अपनी बात कहनी है। सरकार उनका स्वागत करती है, लेकिन धरना-प्रदर्शन करके सरकार पर दबाव डालना गलत है। उन्होंने कहा कि सरेआम हर कुछ बोलने वाले कर्मचारी नेताओं के खिलाफ सर्विस कंडक्ट रूल्स के तहत कार्रवाई की जाएगी। एक ओर कर्मचारी धरने पर है, दूसरी और दफ्तर में हाजिरी लग रही है। उन्होंने कहा कि कार्मिक विभाग ने जो आदेश किए हैं, वह पहले की व्यवस्था है। हिमाचल सरकार ने अपने कर्मचारियों एवं पेंशनर को पंजाब की तर्ज पर छठे वेतनमान के लाभ देने की घोषणा कर रखी है, लेकिन अधिकतर कर्मचारी वेतन विसंगति के कारण नाखुश है। इसके बाद 21 विभागों के 40 कर्मचारी संगठनों का एक संयुक्त कर्मचारी महासंघ गठित किया है, जिसने वेतन विसंगति के खिलाफ लड़ाई का ऐलान कर रखा है। इसी तरह पुरानी पेंशन की बहाली के लिए NPS कर्मचारियों ने विधानसभा घेराव की चेतावनी दे रखी है। इसे देखते हुए सरकार ने कर्मचारियों के प्रदर्शन में शामिल होने पर सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। ओल्ड पेंशन को लेकर हिमाचल में इन दिनों पदयात्रा चल रही है। तीन मार्च को यह पदयात्रा शिमला पहुंचेगी और चार मार्च को इनका विधानसभा के बाहर प्रदर्शन प्रस्तावित है। ऐसे वक्त में कार्मिक विभाग ने यह आदेश जारी किए हैं।