130 दिन बाद जमानत….

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उत्तर प्रदेश | केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को जमानत मिल गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आशीष मिश्रा को जमानत दे दी है। आशीष लखीमपुर में किसानों को थार गाड़ी से रौंदने के मामले में मुख्य आरोपी था। आशीष 130 दिन से जेल में था। हाईकोर्ट ने 18 जनवरी 2022 को आशीष की जमानत अर्जी पर सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था। इस पर आज जस्टिस राजीव सिंह सिंह की एकल पीठ ने फैसला सुनाया है। आशीष की जमानत के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर निशाना साधा है। प्रियंका गांधी ने कहा कि मैं PM मोदी से पूछना चाहती हूं कि कोई नैतिकता है या नहीं? PM मोदी में क्या देश और देशवासियों के प्रति, किसानों के प्रति कोई नैतिक जिम्मेदारी है? आपके मंत्री के बेटे ने किसानों के साथ ऐसा किया। सबसे पहले तो आप उन्हें गिरफ्तार करने के लिए तैयार नहीं थे। मंत्री के बेटे को आज जमानत मिल गई, अब वो खुला घूमेगा। आशीष की जमानत को लेकर किसान नेता राकेश सिंह टिकैत ने तुरंत सवाल उठाया। उन्‍होंने कहा कि वह इस बात को वे UP में भाजपा के खिलाफ प्रचारित करेंगे। उन्होंने गंभीर मामले में जल्दी जमानत मिलने की बात कहकर सवाल उठाया कि कोई आम आदमी होता तो क्या इतनी जल्दी बेल मिलती? वह एक टीवी चैनल से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कोर्ट पर क्या कह सकते हैं, बेल दे दी। हमारा तो यह कहना है कि 302 के इतने गंभीर मामले में दूसरे लोगों को बेल मिली हो तो ठीक है, नहीं मिली हो तो देख लो। चुनाव में इस मुद्दे को लेकर उन्होंने कहा कि हां, हमारा प्रचार का मुद्दा यह रहेगा। क्यों नहीं रहेगा? इतनी जल्दी कौन से तथ्य सामने आ गए, इतनी जल्दी किसी और को जमानत मिलती हो, इस तरह के केस में तो देखने वाले तथ्य हैं। कोर्ट में सुनवाई के दौरान आशीष के वकील ने कहा कि उसका क्लाइंट निर्दोष है। इस बात के कोई सबूत नहीं है कि आशीष मिश्र ने ड्राइवर को प्रदर्शनकारी किसानों को गाड़ी से रौंदने के लिए उकसाया था। वहीं, जमानत का विरोध करते हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल वीके शाही ने कहा कि घटना के वक्त आशीष मिश्र उसी गाड़ी में था, जिसने किसानों को रौंदा था। 18 जनवरी को हुई इस सुनवाई के बाद जस्टिस राजीव सिंह की एकल बेंच ने जमानत के फैसले को सुरक्षित रख लिया था। लखीमपुर में 3 अक्टूबर (रविवार) को किसानों ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा का विरोध करते हुए काले झंडे दिखाए थे। इसी दौरान एक गाड़ी ने किसानों को कुचल दिया था। इस घटना में चार किसानों की मौत हो गई थी। इसके बाद हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में एक पत्रकार समेत 4 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी। इस मामले में मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा समेत 14 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में हुई हिंसा की जांच कर रही SIT ने सोची-समझी साजिश बताया था। SIT के जांच अधिकारी ने 14 दिसंबर को आरोपियों के खिलाफ धाराएं बढ़ाने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। कोर्ट ने ये अर्जी स्वीकार कर ली थी। इससे ये साफ हो गया था कि आशीष व उसके साथियों के खिलाफ दर्ज FIR में गैर इरादतन हत्या का केस चलेगा। नई धाराओं के बाद लोअर कोर्ट से जमानत याचिका खारिज हो गई थी। लखीमपुर हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया था। अक्टूबर से लेकर अब तक टॉप कोर्ट में तीन बार सुनवाई भी हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने SIT को धीमी जांच के लिए फटकारा था। अब कोर्ट में SIT को जांच प्रगति की रिपोर्ट दाखिल करनी है। फंस गए मंत्री अजय मिश्र टेनी:कहा था, ‘बेटा घटनास्थल पर नहीं था, साबित हुआ तो दूंगा इस्तीफा’, विपक्ष बोला- अब देरी क्यों? चुनाव तक मंत्री टेनी के बेटे जेल में ही रहेंगे:लखीमपुर कांड… तकनीकी खामी बताकर वकील ने याचिका वापस ली, अंकित दास समेत 3 की याचिका खारिज |