जिस दिन हुई मौत अब उसी तारीख को मिलेगी सजा…

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महाराष्ट्र | महाराष्ट्र के वर्धा जिले के हिंगणघाट में कॉलेज लेक्चरर अंकिता पिसुदे को सड़क पर पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने के आरोपी विक्की उर्फ ​​विकेश नागराले को बुधवार को अदालत ने हत्या का दोषी करार दे दिया। विशेष लोक अभियोजक एडवोकेट उज्ज्वल निकम ने बताया कि गुरुवार(10 फरवरी) को अदालत विकेश को सजा सुनाएगी। खास यह है कि 10 फरवरी को अंकिता की मौत को पूरे दो साल का समय हो जाएगा। वर्धा पुलिस ने इस केस में सिर्फ 19 दिनों में 426 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने मामले में 64 गवाहों को सुना और 29 गवाहों के जवाब दर्ज किए हैं। कोविड-19 संक्रमण काल में लगे लॉकडाउन की वजह फैसले में कुछ देरी हुई है। पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, 3 फरवरी 2020 को हुई इस वारदात में अंकिता पिसुदे गंभीर रूप से झुलस गईं थी। उसकी आवाज जा चुकी थी। वह सांस भी नहीं ले पा रही थी। मरने से पहले उसके आंखों की रोशनी भी चली गई थी और उसने नागपुर स्थित ऑरेंज सिटी हॉस्पिटल में आखिरी सांस ली थी। सरकार के कई प्रयास के बावजूद नहीं बची अंकिता की जान | पुलिस ने आरोपी विकेश को वारदात वाले दिन ही गिरफ्तार कर लिया थी। सीएम उद्धव ठाकरे ने पीड़ित का इलाज मुख्यमंत्री राहत कोष से करवाने की घोषणा की थी। सरकार ने नवी मुंबई के नेशनल बर्न सेंटर के विशेषज्ञ सुनील केसवानी को नागपुर भेजा था। इसके बावजूद अंकिता को बचाया नहीं जा सका और उन्होंने 10 फरवरी को अंतिम सांस ली थी। स्कूटी से पेट्रोल निकाला और आग लगा दी | वर्धा जिले के दरोदा गांव की रहने वाली अंकिता पिसुदे महिला कॉलेज में लेक्चरर थीं। वह 3 फरवरी 2020 की सुबह 7:15 बजे रोज की तरह 75 किमी दूर कॉलेज जाने के लिए बस में सवार हुई। हिंगणघाट में कॉलेज नजदीक आने पर बस से उतरी। वहां पहले से मौजूद अंकिता के ही गांव का रहने वाला विकेश नागराले (27) अपनी स्कूटी से पेट्रोल निकालकर अंकिता के पास आया। अंकिता कुछ समझ पाती, इससे पहले विकेश ने उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी और वहां से भाग निकला। अंकिता को स्कूली बच्चियों ने बचाया | वारदात के वक्त स्कूल जाने वाली कुछ बच्चियां वहां से गुजर रही थीं। अंकिता को झुलसते देख इन बच्चियों ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया। लोगों ने अंकिता पर पानी डाला। तब तक उसका चेहरा 40% तक झुलस चुका था। प्लास्टिक सर्जन डॉ. दर्शन रेवणवार ने अदालत में बताया कि हॉस्पिटल लाने से पहले अंकिता की आवाज जा चुकी थी। उसका सिर, चेहरा, बायां हाथ, पीठ और गर्दन झुलस गई थी। उसे सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। आग लगाने के बाद अंकिता बुरी तरह से झुलस गईं थीं। आरोपी ने खुदकुशी की भी कोशिश की थी | अंकिता और विकेश में पहले बातचीत थी। बाद में विकेश की शादी हो गई। इसके बाद भी वह अंकिता से शादी करना चाहता था और उसे बात करने की कोशिश करता था। लेकिन अंकिता बातचीत से इनकार करती थी। इसी के चलते वारदात से तीन महीने पहले विकेश ने खुदकुशी की कोशिश की थी। विकेश एक बच्ची का पिता भी है। मां ने कहा था– बेटी महफूज रहे, इसलिए क्या उसे घर में बंद रखते थे | अंकिता की मां ने बेटी की मौत के बाद कहा था,‘‘हमने ऐसा क्या किया था जो हम पर ऐसा संकट आया है? मेरी बेटी की ऐसी हालत करने वाले को सरकार भी ऐसी ही सजा दे। मेरी बेटी के साथ ऐसा हुआ। कल वो छूटा तो किसी और बेटी के साथ ऐसा करेगा। ऐसे दरिंदों को समाज में रहने का अधिकार नहीं है। मेरी बेटी बहुत अच्छी थी। उसने एमएससी किया। तजुर्बा मिले, इसलिए नौकरी की। बेटी महफूज रहे, इसलिए क्या उसे घर में बंद रखते? आज हर जगह बेटियां असुरक्षित हैं। देशभर में ऐसी ही बातें सुनने को मिलती हैं। सरकार को कुछ करना चाहिए।’’
कोरोना की वजह से हुई फैसले में देरी – इस वारदात के बाद स्थानीय लोगों के गुस्से को देखते हुए अदालत ने इस मामले को फास्टट्रैक कोर्ट में ले जाने का निर्णय लिया था। हालांकि 19 दिनों में चार्जशीट के बावजूद फैसला आने में दो साला का समय लग गया। कानूनी जानकार इसके पीछे कोविड-19 को मानते हैं। महाराष्ट्र में इन दो सालों के दौरान अदालतें बंद रहीं। राज्य सरकार ने इस केस में सरकार की ओर से उज्ज्वल निकम को नियुक्त किया था।