फैमिली कोर्ट में सुनवाई……..

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अम्बाला – अम्बाला की एक महिला डॉक्टर के साथ लिव इन रिलेशनशिप में पैदा हुई बच्ची की कस्टडी मामले में गुरुवार को फैमिली कोर्ट में सुनवाई हुई। बच्ची के जैविक पिता का दावा करने वाले एम्स के डॉक्टर नवनीत मग्गो ने हाथ जोड़कर कोर्ट से गुहार लगाई कि उनकी बेटी को बचाया जाए। उनकी बेटी के साथ गलत व्यवहार किया जा रहा है। बच्ची के पास 10 माह से न मां है न पिता। डॉ. मग्गो ने कोर्ट को बताया कि एक केस को निपटाने के लिए उनसे 5 करोड़ की फिरौती तक मांगी गई है।  उल्लेखनीय है कि महिला डॉक्टर ने डॉ. मग्गो पर दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था, जो कैंसिल हो चुका है। बचाव पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि महिला डॉक्टर का पति बच्ची को अपनाने को तैयार है। इसमें क्या समस्या हो सकती है। जज ने कहा कि माना कि आज दोनों सही हैं, लेकिन कल दोनों के बीच कुछ हो जाए तो इसमें डिनाय नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने बचाव पक्ष को वॉर्निंग दी कि वह डीएनए टेस्ट की एप्लीकेशन पर रिप्लाई दें। कोर्ट में बचाव पक्ष ने कहा कि एवीडेंस एक्ट 112 के तहत डीएनए टेस्ट मामले की फैमिली कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकती। याचिकाकर्ता के वकील ने हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग कोर्ट को दिखाई, जिसमें फैमिली कोर्ट इस मामले में सुनवाई कर सकती है। बचाव पक्ष ने कहा कि बच्ची का पितृत्व प्रूव हो जाएगा तो बच्ची नाजायज (बास्टर्ड शब्द का इस्तेमाल किया) कहलाएगी। कोर्ट ने बच्ची को बास्टर्ड कहने पर वकीलों को फिर से फटकार लगाई। बचाव पक्ष ने कहा कि महिला डॉक्टर अपने पति के साथ रह रही है तो याचिकाकर्ता डॉ. मग्गो ने कोर्ट को बताया कि महिला डॉक्टर के ससुर ने पुलिस को बताया है कि वह यूएई में रह रही है, जबकि बच्ची अम्बाला में उनके पास है।