4.34 करोड़ रुपए की ठगी…….

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अम्बाला – अम्बाला कैंट में नामी सिंगला अस्पताल के संचालक जनरल फिजिशियन डॉ. ओमप्रकाश सिंगला के परिवार से दोगुना रिटर्न देने वाली इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर 4.34 करोड़ रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। उन्हें झांसा दिया गया था कि पॉलिसी मैच्योरिटी पर 50 करोड़ रुपए मिलेंगे। 5 साल तक सिंगला परिवार अलग-अलग पॉलिसी के नाम पर प्रीमियम जमा करता रहा। उसके बाद मैच्योर पॉलिसी का पैसा रिफंड कराने के नाम पर भी लाखों रुपए दिए। अब कैंट थाने में 9 आरोपी-कपिल नारंग, प्रवीन जैन, रविंद्र त्रिपाठी, सरोजा कुलकर्णी, अर्पित धींगरा, यादगिरी, जय दत्त शर्मा, रवि सक्सेना व करुनीश गांधी के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। पुलिस मान रही है कि यह भी डेटा चोरी के जरिये ऑनलाइन ठगी का ही एक तरीका है, क्योंकि साल 2014 में डॉ. सिंगला ने कुछ पॉलिसी कराई थी। फिर उनके पास फोन आया। फोन करने वाले के पास इन पॉलिसी की डिटेल थी। उस व्यक्ति ने बेहतर रिटर्न वाली पॉलिसी ऑफर की।  इसी भरोसे में सारा खेल हुआ। डॉ. सिंगला के बेटे वरुण सिंगला गायनी प्लास्टिक सर्जन हैं। वे पंचकूला के साथ रोटरी एवं कैंसर अस्पताल में ओपीडी देखते हैं। पुत्रवधू प्रियंका दिल्ली में रेडियोलॉजिस्ट हैं। डॉ. सिंगला ने पुलिस को जो शिकायत दी है, उसमें पॉलिसी या किसी कंपनी का जिक्र नहीं किया है। इसके अलावा जिन 9 लोगों के नाम दिए हैं, उनके भी सिर्फ मोबाइल नंबर दिए हैं। मैच्योरिटी पर 50 करोड़ मिलने का झांसा दिया, अनुमति के नाम पर भी लाखों लिए “अप्रैल 2014 में किसी व्यक्ति का फोन आया। जिसने मेरी कुछ दिन पहले कराई गई पॉलिसी की जानकारी दी और कहा कि नई पॉलिसी में निवेश करने पर दोगुने से ज्यादा रिटर्न मिलेगा। मैं झांसे में आ गया और अपने व परिवार के नाम पर कई पॉलिसी लीं। 4 साल तक प्रीमियम जमा किया। मैच्योिरटी पर पॉलिसी भुनाने की कोशिश की तो कहा गया कि भुगतान ज्यादा है, इसलिए केस हेड आॅफिस भेजा है। एक साल के दौरान फाइल क्लियर कराने की बात कहकर शुल्क के नाम पर लाखों रुपए ले लिए। जब पैसे देने से मना करता तो निवेश डूबने का डर दिखाते। अगस्त 2019 से दिसंबर 2019 तक सरोजा, अर्पित व जय दत्त नाम के व्यक्ति ने खुद को दिल्ली ऑफिस का बताते हुए बात की। कहा गया कि 50 करोड़ मिलने हैं। आरबीआई व वित्त मंत्रालय की अनुमति जरूरी है। इसलिए और पैसा देना होगा। कपिल नारंग नाम का व्यक्ति घर आकर लाखों रुपए फाइल क्लियर कराने के नाम पर ले गया। जब पैसे देने से मना कर दिया, तब कहा गया कि सारा फंड शून्य हो गया है। हमें दिया हुआ डिमांड ड्राफ्ट व लेटर फर्जी निकले।’