कोई मौका नहीं चूक रही……….

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नई दिल्ली – दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक पार्टी, दूसरी पार्टी को दागदार और खुद को साफ-सुथरी बताने का कोई मौका नहीं चूक रही। ऐसे में यह जानना दिलचस्प होगा कि विधानसभा चुनाव 2008, 2013 और 2015 के दौरान आपराधिक और गंभीर आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों की क्या स्थिति रही। तीनों चुनाव में आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों की संख्या राष्ट्रीय पार्टियों में ज्यादा रही और भाजपा में सबसे ज्यादा थी। चुनावों पर नजर रखने वाली संस्था एडीआर-इलेक्शन वाॅच के मुताबिक 2008 के विस चुनाव में 790 उम्मीदवारों में से 111 (14%) उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों का खुलासा किया था। जबकि 2013 विस चुनाव में कुल 796 उम्मीदवारों में से 129 (16%) उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज थे। वहीं 2015 में कुल 673 उम्मीदवारों में से 114 (17%) उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज थे। इस लिहाज से 2008 से 2015 के बीच आपराधिक मामले वाले उम्मीदवारों की संख्या में इजाफा ही हुआ है। गंभीर आपराधिक मामलों की बात करें तो 2008 में 790 उम्मीदवारों में से 32 (4%) के खिलाफ गंभीर आपारिधक मामले दर्ज थे। जबकि 2013 में 796 उम्मीदवारों में से 93 (12%) ने गंभीर आपराधिक मामले का खुलासा किया था। वहीं 2015 में 676 उम्मीदवारों में से 74 (11%) के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। 2015 के चुनाव में 70 फीसदी उम्मीदवारों ने बताया था कि उनकी उम्र 25 से 50 साल है। 2013 में 57 प्रतिशत और 2008 में 43 प्रतिशत उम्मीवार इस उम्र वर्ग के थे। 2008 में जहां 790 उम्मीदवारों में से 180 (23%) करोड़पति उम्मीदवार थे। वहीं 2013 में 796 में से 265 उम्मीदवार (33%) करोड़पति थे। 2015 में 673 उम्मीदवारों में से 230 यानी (34%) उम्मीदवार करोड़पति थे। साफ है कि लगातार करोड़पति उम्मीदवारों में वृद्धि दर्ज की गई है। 2008 के आकंड़ों के मुताबिक, आपराधिक मामले वाले उम्मीदवार सबसे अधिक 67 कांग्रेस के थे। उसके बाद भाजपा के 63, बसपा के 64, जदयू 11, सपा 31, लोजपा 37, राकांपा 15, एसएचएस (शिवसेना) 8 और अन्य के 494 उम्मीदवार थे। वहीं गंभीर आपराधिक मामले वाले उम्मीदवारों की संख्या 2008 में सबसे अधिक 22 भाजपा में थी और सबसे कम जदयू 1 और एसएचएस के 1 थे। वहीं 2013 में सबसे अधिक 31 भाजपा उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज थे। वहीं कांग्रेस के 15, बसपा के 14 और जदयू के 8 थे और आप के 5 जबकि सबसे कम शिवसेना के 2 उम्मीदवार थे। वहीं 2015 में भाजपा के सबसे अधिक 27 और कांग्रेस के 21, बसपा के 12 आप के 23 और एसएचएस के 4 उम्मीदवार थे। अगर शैक्षित योग्यता की बात करें तो 2008 के चुनाव में 41 फीसदी प्रत्याशी 12वीं पास थे।