सनी देओल और सुनील जाखड़ के बीच मुकाबला…..

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कमा पर लगा चुनावी अमला - गुरदासपुर

जालंधर- पंजाब की 13 लोकसभा सीटों में से 13 सीटों के रुझान सामने आ चुके हैं। इनमें सनी ने बढ़त बना ली है। अब तक 8 पर कांग्रेस, 4 पर अकाली दल-भाजपा और 1 सीट पर आप के भगवंत मान आगे हैं। राज्य में कुल 278 प्रत्याशी मैदान में हैं। गुरदासपुर सीट भाजपा की तरफ से सुपर स्टार सनी देओल को उतारे जाने के चलते यह सीट सबसे हाईप्रोफाइल सीट बन गई है। सनी का मुकाबला कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ से है। जानें दिनभर के अपडेट्स…
9:40 बजे: गुरदासपुर से सनी देओल-12872, संगरूर से भगवंत मान-18993, पटियाला से परनीत कौर-12338, बठिंडा हरसिमरत कौर-1893, लुधियाना से रवनीत बिट्‌टू-6796, आनंदपुर साहिब से मनीष तिवारी-3232, अमृतसर से गुरजीत औजला-7868, फरीदकोट से मोहम्मद सदीक-1417, फतेहगढ़ साहिब से अमर सिंह-5730, फिरोजपुर से सुखबीर बादल-17231, होशियारपुर से सोम प्रकाश-11367, खडूर साहिब से जसबीर सिंह-22402 और जालंधर में संतोख सिंह चौधरी-4840 से आगे।
9:00 बजे: सामने आए 11 सीटों के रुझान में पटियाला से परनीत की बढ़त कम होकर 1498 की रह गई। संगरूर में कांग्रेस के केवल सिंह पर आप के भगवंत मान ने 1417 की बढ़त बनाई। बठिंडा में कांग्रेस के अमरिंदर सिंह राजा पर भाजपा-शिअद उम्मीदवार हरसिमरत कौर ने 926 की बढ़त बनाई। आनंदपुर साहिब में मनीष तिवारी ने 135 वोटों की बढ़त बना ली। फिरोजपुर में कांग्रेस के शेर सिंह घुबाया पर शिअद प्रधान सुखबीर बादल 1195 वोटों से आगे थे, वहीं खडूर साहिब ने कमाल कर जसबीर सिंह ने 10309 की लीड ली।
8:50 बजे: प्रदेश की 13 में से 7 सीटों के रुझान सामने आए, जिनमें गुरदासपुर में भाजपा-शिअद उम्मीदवार सनी देओल ने कांग्रेस के सुनील जाखड़ पर 1467 वोटों की बढ़त बना ली। लुधियाना से पीडीए के सिमरजीत सिंह बैंस ने रवनीत सिंह बिट्‌टू से 304 की, आनंदपपुर साहिब में भाजपा-शिअद के प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने मनीष तिवारी पर 1236 की तो पटियाला से कांग्रेस की परनीत कौर ने सुरजीत सिंह रखड़ा पर 2359 की बढ़त बनाई थी।
8:30 बजे: पहला रुझान खडूर साहिब से आया। इस वक्त कांग्रेस के जसबीर सिंह डिम्पा शिअद-भाजपा की बीबी जागीर कौर से 721 वोटों से आगे थे।
गुरदासपुर सीट भाजपा की तरफ से सुपर स्टार सनी देओल को उतारे जाने के चलते यह सीट सबसे हाईप्रोफाइल सीट बन गई है। सनी का मुकाबला कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ से है। एक तरफ सनी का खुद का स्टारडम, दूसरा भाजपा का मोदी फैक्टर, तीसरा पहले चार बार सांसद रह चुके फिल्म अभिनेता विनोद खन्ना की तरफ से करवाए गए इलाके में काम। दूसरी ओर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ भले ही मौजूदा सांसद हैं। हालांकि इस सीट पर विभिन्न पार्टियों के बैनर तले और निर्दलीय उम्मीदवारों की कुल संख्या 15 है, लेकिन तीन बड़े चेहरों सनी देओल, सुनील जाखड़ और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी पीटर मसीह चीदा में असल टक्कर सिर्फ सनी देओल और सुनील कुमार के बीच लग रही है।
यहां सबसे ज्यादा उम्मीदवार, असल टक्कर कांग्रेस और एनडीए में
प्रदेश में उम्मीदवारों की सबसे लंबी फेहरिस्त अमृतसर सीट के नाम से है। यहां कुल 30 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जिनमें से कांग्रेस और एनडीए के बीच कांटे की टक्कर बनी हुई नजर आ रही है। मौजूदा वक्त में यह सीट कांग्रेस के पाले में है। 2014 में आम चुनाव में यहां से कैप्टन अमरिंदर जीतकर संसद पहुंचे। बाद में पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया तो 2017 में उपचुनाव कराना मजबूरी बन गया, जिस दौरान फिर से कांग्रेस को जीत मिली। यहां गुरजीत सिंह औजला ने एनडीए के राजिंदर मोहन सिंह छीना को 1,99,189 के अंतर से हराया था। बड़ी बात है कि 2014 में मोदी लहर के बावजूद भाजपा यह सीट हार गई थी।
2009 में नए परिसीमन के बाद के बाद दोनों बार जीता एनडीए
खडूर साहिब सीट भी पहले तरनतारन के नाम से थी। यहां पहले पांच चुनाव कांग्रेस ने लगातार जीते, जिसके बाद से यह सीट अकाली दल का गढ़ मानी जाती है। 2009 में खडूर साहिब के नाम से हुए पहले चुनाव में रतन सिंह अजनाला और 2014 में रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा संसद पहुंचे। माैजूदा सांसद रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा चुनाव नहीं लड़ रहे। इस वक्त यहां कुल 19 उम्मीदवारों में असल मुकाबला एनडीए की बीबी जागीर कौर और कांग्रेस के जसबीर सिंह गिल के बीच है। ताजा हालात की बात की जाए तो इस लोकसभा क्षेत्र के 9 में एक भी विधायक अपना पंथक गढ़ बचाना चाह शिअद-बादल का नहीं है, वहीं ब्रह्मपुरा के जाने से शिअद-बादल को टकसाली समर्थकों से डर है। कांग्रेस को भितरघात का डर सता रहा है। 2009 के चुनाव में भी कांग्रेस कैंडिडेट राणा गुरजीत को पार्टी में भितरघात की कीमत चुकानी पड़ी थी।
अकालियों के लिए अभेद्य रहा है जालंधर का किला
जालंधर सीट शुरू से कांग्रेस का अभेद्य किला बना हुआ है, वहीं 2014 के चुनाव में भी मुकाबला एकतरफा हो गया था। इस बार अकाली दल ने लंबे समय के बाद कोई सिख चेहरा उतारा है। दूसरा पहले की बजाय भाजपा की सक्रियता शहरी इलाके में बढ़ी है। इन दोनों बातों का फायदा चरणजीत सिंह अटवाल को मिलता नजर आ रहा है। हालांकि पिछले चुनाव में यहां से कांग्रेस के चौधरी संतोख सिंह ने अकाली दल के पवन कुमार टीनू को 70,981 वोटों से हराया था। अब फिर से यहां संतोख चौधरी उम्मीदवार है, वहीं 19 उम्मीदवारों की लंबी लिस्ट के बावजूद उनकी सीधी टक्कर एनडीए के चरणजीत सिंह अटवाल से है।
एनडीए को विधायक पर भरोसा, टक्कर में दो डॉक्टर
होशियारपुर में भाजपा के सामने बड़ी दुविधा गुटबंदी की है। विजय सांपला पर पार्टी का ध्रुवीकरण करने के आरोप के चलते उनका टिकट कट गया, मौका प्रतिद्वंद्वी गुट को लीड कर रहे फगवाड़ा के विधायक सोमप्रकाश को मिला है। 2009 में कड़े मुकाबले के बाद हारे सोम प्रकाश को प्रदेश के भाजपा प्रमुख श्वेत मलिक और शिरोमणि अकाल दल के वरिष्ठ नेताओं का करीबी माना जाता है। उन्हें केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का भी समर्थन प्राप्त है। अब विजय सांपला गुट इससे नाराज है। कांग्रेस ने डॉ. राजकुमार चब्बेवाल से उनकी सीधी टक्कर मानी जा रही है, वहीं तीसरे मजबूत उम्मीदवार के रूप में आम आदमी पार्टी के डॉ. रवजोत सिंह हैं।
हार-जीत का फैसला करने में आप के वोट अहम
लुधियाना सीट पर 2014 में मोदी लहर के बावजूद जीत हासिल करने वाले कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्‌टू को चौथे नंबर पर रहे सिमरजीत सिंह बैंस की इस बार बड़ी चुनौती है। दूसरे नंबर पर रही आप भी इस बार दूसरों का खेल बनाने और बिगाड़ने का काम करेगी। इसके नाराज वोटर्स का फायदा पीडीए के उम्मीदवार सिमरजीत सिंह बैंस को मिल सकता है। खासकर तीन ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों जगराओं, गिल और दाखां में। शिअद-भाजपा प्रत्याशी महेश इंदर सिंह ग्रेवाल ब्रांड मोदी के नाम पर चुनाव लड़ रहे हैं। वजह भी है। 69 साल के ग्रेवाल 12 साल बाद चुनाव लड़ रहे हैं। देखते हैं कि 22 में से आखिर किस उम्मीदवार को कितने वोट मिलने वाले हैं।
बादलों के गढ़ में राजा को ला कांग्रेस ने की चुनौती खड़ी
बठिंडा सीट लगभग दो दशक से ज्यादा समय से बादल परिवार का गढ़ रही है। 27 उम्मीदवारों में शामिल एनडीए की हरसिमरत कौर 2009 में यहां से पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेटे रनिंदर सिंह को हराकर पहली बार लोकसभा पहुंची थी, वहीं 2014 में शिअद छोड़कर कांग्रेसी हुए अपने देवर मनप्रीत बादल को 19 हजार वोट अंतर से हराया था। इस बार कांग्रेस ने हरसिमरत के मुकाबले राजा वड़िंग को उतारकर मुकाबले को और कड़ा बना दिया है। साथ ही हरसिमरत को पंजाब की राजनीति में दलबदलू नेता की छवि वाले सुखपाल खैहरा और आप नेता बलजिंदर कौर से कड़ी टक्कर मिल रही है। वहीं राजा वड़िंग, हरसिमरत और खैहरा तीनों ही आप के वोटर्स के समर्थन का दावा कर रहे हैं।
पड़ोस के विकास के नाम पर वोट मांगे पूर्व डिप्टी सीएम ने
फिरोजपुर संसदीय सीट में 3 जिलाें के 9 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। यहां 16 लाख 18 हजार 419 मतदाता हैं, वहीं कुल 22 उम्मीदवार चुनाव लड़ने उतरे। इस सीट पर 5 संसदीय चुनावों से लगातार शिअद का कब्जा है। 2014 में शिअद से संसद पहुंचे शेर सिंह घुबाया इस बार कांग्रेस की टिकट पर मैदान में हैं। गढ़ बचाने के लिए इस बार शिअद से खुद सुखबीर बादल चुनाव लड़ रहे हैं। आम आदमी पार्टी की हालत 2014 जैसी नहीं है। यहां सबसे ज्यादा वाेटिंग करने का क्रेज राय-सिख बिरादरी में है और वाेट भी इन्हीं के सबसे ज्यादा 19 फीसदी हैं। सुखबीर ने हर सभा में बठिंडा में हुए विकास के नाम पर वोट मांगे। बरगाड़ी कांड और नशे का मुद्दा अबाेहर, फाजिल्का, जलालाबाद, बल्लुआना, गुरुहरसहाय में बरगाड़ी कांड ज्यादा हावी होता नहीं दिख रहा, लेकिन फिरोजपुर सिटी, फिरोजपुर रूरल, मुक्तसर और मलोट में असर दिख सकता है। दोनों में मुकाबला कांटे का है, लेकिन लोगों का मानना है कि जो भी जीतेगा, ज्यादा अंदर से नहीं जीने वाला।
सीएम सिटी के नाम की सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय
पटियाला सीट इस बार भी हॉट है। 25 प्रत्याशियों में एक लगातार 3 बार सांसद रही परनीत कौर को पिछली बार आप के डॉक्टर धर्मवीर गांधी ने 20,942 वोटों से हराया था। इस बार वह पंजाब डेमोक्रेटिक एलायंस (पीडीए) से चुनाव लड़ रहे हैं। 2009 की तुलना में 2014 में 1,29,459 कम वोट पाने वाली महारानी इस बार पिछली बार से ज्यादा आशावान नजर आ रही हैं। इस बार पटियाला सीट जीतना परनीत की नाक का सवाल है, क्योंकि कैप्टन साहब खुद सत्ता में हैं और उनकी तरफ से खूब जोर लगाए जाने की बातें सामने आई। पूर्व कैबिनेट मंत्री रखड़ा अपने कैडर वोट और मोदी के नाम के सहारे मैदान में हैं। मुकाबला त्रिकोणीय है, पर डॉक्टर गांधी अपने काम और सरल स्वभाव के दम पर चर्चा में हैं।
यहां कांग्रेस, एनडीए और आप का त्रिकोणीय मुकाबला
संगरूर सीट में आती 9 विधानसभा सीटाें पर पिछले चुनाव में 3 कांग्रेस, 5 आप और एक शिअद को जीत मिली। यहां से भगवंत मान आम आदमी पार्टी के बैनर से सांसद हैं। हाल ही में थोड़े दिन पहले मान पार्टी के प्रदेश प्रधान भी बन गए हैं। उन्होंने पिछले चुनाव में अकाली दल के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींडसा को दो लाख से अधिक मतों से हराया था। इस बार कुल 25 उम्मीदवारों में से भगवंत की टक्कर में एनडीए ने ढींढसा के बेटे परिमंदर सिंह को उतारा है तो कांग्रेस से कैप्टन अमरिंदर के खासमखासों में शामिल केवल सिंह ढिल्लों टक्कर दे रहे हैं। भगवंत मान काे नशे पर केजरीवाल द्वारा मांगी गई माफी का विरोध सहना पड़ रहा है। भगवंत के शराब पीने की आदत का धब्बा अभी साफ नहीं हुआ। कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं ला सके। कैप्टन अमरिंदर सिंह का दायां हाथ समझे जाते केवल सिंह ढिल्लों से बड़े कारोबारी होने के चलते बड़े उद्योग आने की उम्मीद है। उधर अकाली दल-बादल के परमिंदर सिंह ढींडसा शरीफ कैंडिडेट के तौर पर जाने जाते हैं।
दो रिटायर्ड आईएएस दोस्तों में है कड़ा मुकाबला
22 उम्मीदवारों वाली फतेहगढ़ साहिब सीट प्रमुख मुकाबला अकाली दल के रिटायर्ड आईएएस अफसर दरबारा सिंह गुरु और कांग्रेस के रिटायर्ड आईएएस अफसर डॉ. अमर सिंह के बीच है। दोनों आपस में पुराने दोस्त बताए जा रहे हैं। हालांकि टक्कर में पीडीए के इंजीनियर उम्मीदवार मनविंदर सिंह ग्यासपुरा भी हैं। शिअद के दरबारा सिंह गुरु ने अकाली सरकार की 10 साल की उपलब्धियां गिनाई। कांग्रेस के डॉ. अमर सिंह रायकोट की अपनी उपलब्धियाें के दम पर वोट मांगे, वहीं 84 के दंगों में उजड़ चुके हरियाणा के पंजाबी गांव होंद चिल्ड़ के लोगों को इंसाफ दिलाने के मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने सरकारी नौकरी छोड़ गांव के लिए लड़ाई लड़ी। गुड़गांव के पटौदी में सिखों को मुआवजा दिलाया। यह भी बदलाव की राजनीति की बात कह वह प्रचार में उतरे थे। 2004 (रोपड़ सीट थी तब), 2009 और 2014 के चुनाव के दौरान वोटरों ने मौजूदा सरकार के उलट उम्मीदवारों को जिताया।
बाबा फरीद के नाम पर सीट का नाम, टक्कर कांग्रेस-एनडीए में
फरीदकोट सीट पर भी 2014 के लोकसभा चुनाव में साधारण परिवार के रिटायर्ड प्रोफेसर साधू सिंह ने आप की सीट पर चुनाव लड़कर पौने दो लाख वोट से जीतकर सबके सियासी गणित फेल कर दिए थे। वह 5 साल के कार्यकाल में फरीकोट में कोई बड़ा प्रोजेक्ट न ला पाए। अब फिर से विकास के वादे कर वोट मांगे। आप की सीट पर जैतो से जीते विधायक मास्टर बलदेव बागी होकर पीडीए की टिकट पर आप के प्रो. साधू सिंह को चुनौती दे रहे हैं, वहीं आप यहां बंटी हुई है। बरगाड़ी इश्यू की जातीय समीकरण से काट करने के लिए शिअद एससी विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व सामाजिक सुरक्षा मंत्री गुलजार सिंह रणिके को शिअद ने उतारा है, क्योंकि यहां 35% वोट मजहबी सिख भाईचारे की है, मगर मोगा में जत्थेदार तोता सिंह और जैन ग्रुप में दूरी होने से रणिके की राह आसान नहीं। कांग्रेस के मोहम्मद सदीक कांग्रेस छोड़ शिअद में गए पूर्व विधायक जोगिंद्र पंजगराही गुट को तोड़ने में कामयाब रहे। 6 विधानसभा में कांग्रेस के विधायक हैं।
अकाली-कांग्रेस में सीधी टक्कर, बसपा और आप बिगाड़ेंगे खेल
पहले होशियारपुर और फिर रोपड़ का हिस्सा रहा यह इलाका 2008 में आनंदपुर साहिब सीट से लोकसभा हलके के रूप में अस्तित्व में आया। अभी तक 7 बार शिअद और 6 बार कांग्रेस जीत चुकी है। फिलहाल अकाली दल-भाजपा के प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा सांसद हैं। गठबंधन ने दूसरी बार विश्वास जताया है, जिनकी टक्कर कांग्रेस के मनीष तिवारी से है। आप कैंडिडेट नरेंद्र शेरगिल और पीडीए के बिक्रम सोढी चाहे सीधा मुकाबला नहीं दे पा रहे पर कांग्रेस और शिअद कैंडिडेट का खेल जरूर बिगाड़ सकते हैं। सोढी को 5 छोटी पार्टियों की सपोर्ट है। कांग्रेस उम्मीदवार मनीष तिवारी का सारा जोर खुद को लोकल साबित करने पर लगा था और अकाली-भाजपा के प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने केंद्र में मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनवाकर वोट मांगे।
एनडीए को 6 सीटें मिली थी पिछली बार
पिछले चुनाव में एनडीए ने पंजाब में खडूर साहिब, आनंदपुर साहिब, फिरोजपुर, बठिंडा, गुरदासपुर और होशियारपुर सीटें जीती थीं। हालांकि विनोद खन्ना के निधन के बाद गुरदासपुर सीट पर हुआ उपचुनाव कांग्रेस ने जीत लिया। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान पंजाब में अकाली-भाजपा की सरकार थी, लेकिन अब कांग्रेस सत्ता में है। दूसरी ओर ‘आप’ के कई विधायक टूटकर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं।

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