महिलाओं ने कहा- उनकी घरों में निर्णय लेने की हैसियत बढ़ी

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पटना. बिहार में शराबबंदी के तीन साल पूरे हो चुके हैं। 4 अप्रैल 2016 को राज्य सरकर ने पूर्ण शराबबंदी की घोषणा की थी। आचार संहिता लागू होने के कारण नाम न छापने की शर्त पर बिहार पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमने पिछले छह महीने में सभी जिलों में करीब 160 मीटिंग की है। शराबबंदी को लेकर हुई इन बैठकों में एक-एक बार में 5000 तक लोग आए हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं भी आती हैं। भास्कर से बात करते हुए बिहार के जेंडर रिसोर्स सेंटर के सीनियर कंसल्टेंट एस आनंद कहते हैं कि बिहार में महिलाओं का खान-पान और बच्चों की पढ़ाई सुधरी है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा में कमी दर्ज की गई है। 58% महिलाओं का कहना है कि पारिवारिक मामलों में उनकी निर्णय लेने की हैसियत बढ़ी है।

दो कहानियां

पहली : शराब के कारण मां-बेटे जेल गए, अब चाय की दुकान पर भीड़ लगी रहती है

नवादा जिले के नारदीगंज का रहने वाला तन्नू शराब बेचा करता था। प्रसिद्धी इतनी थी कि शराबी ढूढ़ते हुए घर तक पहुंच जाते थे। कई बार जेल भी जा चुका था। शराबबंदी के बाद तन्नू की मां और दो बेटे जेल भेज दिए गए। इस घटना के बाद उसमें बदलाव आया। बाहर आते ही शराब का धंधा छोड़ दिया। मां शांति देवी कहती हैं कि इस कारोबार से मुक्ति के बाद चाय की दुकान चलाती हूं। बेटा भी हाथ बंटाता है। लिहाजा, परिवार ठीक-ठाक चल रहा है। अब चाय की दुकान सुबह 5 बजे से 9 बजे तक खुलती है, लोग हमारी चाय पीने के लिए दुकान खुलने का इंतजार करते हैं। हम चार घंटे की दुकानदारी में ही इतना कमा लेते हैं कि परिवार का भरण-पोषण आसानी से हो जाता है।

दूसरी : पहले शराब बेचते थे, गांव में हंगामा होता था, अब दूध का व्यापार करने लगे

पूर्णिया की लाइन बस्ती में पहले शराब के लिए किशनगंज, कटिहार और अररिया तक से लोग पहुंचते थे। यहां लोगों की कमाई इसी से थी। शराबबंदी के बाद गांव की महिला ललिता देवी और समाजसेवी मणि कुमार ने संस्था बनाकर गाय पालन की योजना शुरू की। बिहार सरकार ने इसी टोले के 11 लोगों को शराब छोड़कर मुख्यधारा से जोड़ने की कवायद के तहत गाय दी गई। इस पहल ने गांव के लोगों को नई ऊर्जा दी और उन्होंने शराब के बजाय दूध का कारोबार किया। ललिता देवी और मणि कुमार द्वारा 50 से अधिक लोगों को गाय दिलाई गईं। गांव को दुग्ध समिति की भी स्वीकृति मिल गई। बाद में सरकार द्वारा और 118 लोगों को गाय दिलाई गई। अब यहां दूध का बड़ा व्यवसाय हो रहा है। यहां की मुनकी देवी ने बताया कि पहले शाम होते ही अधिकांश घरों में शराब पीकर हंगामा होता था, बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते थे। अब माहौल बदला है।

महिलाओं का घर में प्रभाव बढ़ा, बात सुनी जाने लगी

58% महिलाओं ने माना कि शराबबंदी के बाद घरों में निर्णय लेने में उनका प्रभाव बढ़ा है।
23% महिलाओं ने कहा कि उनका प्रभाव घर के अलावा गांव के मुद्दों तक बढ़ा है।
57% महिलाओं ने माना कि अब वह पहले से ज्यादा सब्जी बनाने लगी हैं।
29% महिलाओं ने कहा कि वे अब पहले से ज्यादा दूध का सेवन करने लगी हैं।
19% लोगों ने माना कि अब उनके बच्चे निजी ट्यूशन करने लगे हैं

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