ज्यादा बड़ी मूर्तियां रखने से बचें – घर के मंदिर में

पूजा-पाठ : घर में मंदिर बनाने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। मान्यता है कि मंदिर की वजह से घर में सकारात्मकता बनी रहती है। इस संबंध ध्यान रखना चाहिए कि मंदिर के आसपास गंदगी नहीं होनी चाहिए, नियमित रूप से सुबह-शाम पूजा करनी चाहिए। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए घर के मंदिर से जुड़ी कुछ खास बातें…
मंदिर से जुड़ी खास बातें

  • घर के मंदिर में ज्यादा बड़ी मूर्तियां न रखें। शिवपुराण के अनुसार मंदिर में हमारे अंगूठे के आकार से बड़ा शिवलिंग नहीं रखना चाहिए। शिवलिंग बहुत संवेदनशील होता है और इसी वजह से घर के मंदिर में छोटा सा शिवलिंग रखने का नियम है। अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी छोटे आकार की ही रखनी चाहिए।
  • ध्यान रखें मंदिर में खंडित मूर्तियां न रखें। जो भी मूर्ति खंडित हो जाती है, उसे मंदिर से हटा देना चाहिए। खंडित मूर्तियां पूजा के लिए अशुभ मानी गई हैं, लेकिन ध्यान रखें सिर्फ शिवलिंग कभी भी, किसी भी अवस्था में खंडित नहीं माना जाता है, शेष देवी-देवताओं की मूर्तियां टूटी हो तो उन्हें मंदिर में न रखें।
  • रोज रात में सोने से पहले मंदिर पर पर्दा डाल देना चाहिए। जिस प्रकार हम सोते समय किसी भी तरह की बाधा पसंद नहीं करते हैं, ठीक उसी भाव से मंदिर पर भी पर्दा ढंक देना चाहिए। जिससे भगवान के विश्राम में बाधा उत्पन्न ना हो।
  • घर में पूजा करने वाले व्यक्ति का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होगा तो ये बहुत शुभ रहता है। इसके लिए मंदिर का दरवाजा पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। अगर ये संभव न हो तो पूजा करते समय व्यक्ति का मुंह पूर्व दिशा में होगा तब भी श्रेष्ठ फल प्राप्त होते हैं।
  • शौचालय के आसपास मंदिर बनाने से बचना चाहिए। ऐसी जगह पर मंदिर शुभ फल नहीं देता है। इसकी वजह से वास्तु दोष बढ़ते हैं।
  • घर में मंदिर ऐसी जगह पर बनाना चाहिए, जहां कुछ देर के लिए सूर्य की रोशनी अवश्य पहुंचती हो। सूर्य की रोशनी और ताजी हवा से घर के कई दोष शांत हो जाते हैं। सूर्य की रोशनी वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करती है।
  • सुबह और शाम घर में पूजा जरूरी करनी चाहिए। मंदिर में दीपक जलाएं। पूजन में घंटी बजाएं। घंटी की आवाज और दीपक की रोशनी से नकारात्मकता नष्ट होती है।
  • जब भी श्रेष्ठ मुहूर्त आते हैं, तब पूरे घर के मंदिर में और अन्य कमरों में गौमूत्र का छिड़काव करें। गौमूत्र के छिड़काव से पवित्रता बनी रहती है और वातावरण सकारात्मक हो जाता है।
  • पूजा में बासी फूल, पत्ते अर्पित न करें। स्वच्छ और ताजे जल का ही उपयोग करें। ध्यान रखें तुलसी के पत्ते और गंगाजल कभी बासी नहीं माने जाते हैं, इनका उपयोग कभी भी किया जा सकता है।
  • घर में जिस जगह पर मंदिर बना है, वहां चमड़े से बनी चीजें, जूते-चप्पल नहीं ले जाना चाहिए।

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