आगरा में अशोक कॉसमोस मॉल दे रहा मौत को दावत….

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तीन माह से बिना फायर एनओसी के संचालन
नियमों की अनदेखी पर नहीं हुआ एनओसी का नवीनीकरण
हाई कोर्ट ने जनहित याचिका पर मुख्यमंत्री को किया तलब
यूपी सरकार के महाधिवक्ता ने दाखिल किया हाई कोर्ट में काउंटर
माॅल संचालिका से जुगलबंदी कर रहे प्रशासन का छूटा पसीना

संजय प्लेस में बना अशोक कॉसमोस मॉल मौत की दावत दे रहा है। यह हम नहीं कह रहे, सरकारी महकमा “फायर ब्रिगेड” कह रहा है। इस माॅल की कई मंजिल अवैध तरीके से बना दी गई हैं। माॅल संचालकों ने इसके लिए आगरा विकास प्राधिकरण और फायर से नियमानुसार एनओसी लेने तक की जरूरत नहीं समझी। फर्जी कागजातों के जरिए माॅल संचालिका कई साल तक फायर ब्रिगेड को गुमराम करता आया है। आखिरकार डीजी फायर ने इस माॅल को फर्जी कागजात पर दी गई अनापत्ति प्रमाण पत्र खारिज कर दिया और नियमों का उल्लंघन कर बिल्डिंग खडी किए जाने की तोहमत लगाकर एनओसी भविष्य में देने से इनकार कर दिया।
माॅल संचालिका के पास फायर ब्रिगेड की जो एनओसी थी, उसकी तारीख 31 दिसंबर 2018 को समाप्त हो गई। यानी एक जनवरी 2019 से काॅसमाॅस माॅल फायर की बिना अनुमति के संचालित है। हैरानी की बात है कि इसकी जानकारी आगरा प्रशासन, एडीए, पुलिस और नगर निगम को है। बावजूद इसके, प्रशासनिक अधिकारी “अंधेर नगरी चैपट राजा..” कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं।

हजारों जानों पर मंडराता है हर दिन मौत का साया

अशोक कॉसमोस मॉल की संचालिका कितने बेखौफ हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस माॅल के दो ब्लाॅक के बीच खाली जगह रास्ता है। उसे भी मिलाकर पाट लिया गया है। एडीए की पार्किंग है, उसे भी पाटकर प्लेटफार्म बना लिया गया है। बिल्डिंग बनाने के लिए जरूरी होता है पहले नक्शा पास हो और फायर ब्रिगेड से एनओसी ली जाए। ऐसा भी नहीं किया गया। दरअसल इस माॅल की संचालिका का ऐसा रसूख है कि तमाम अधिकारी उनके आभा मंडल में अंधे हो गए। इसी का नतीजा है कि बिल्डिंग गलत तरीके से बनती गई। इसकी किसी ने शिकायत की तो उसे अनदेखा कर दिया गया। माॅल की पार्किग में इजी डे का रिटेल शो रूम खोल दिया गया। एडीए के नियमानुसार बजीरपुरा साइट पर फ्रंट का खाली स्थान नहीं छोडा गया। यहां हर दिन हजारों की संख्या में बच्चे, महिलाएं और आमजन आते हैं। फायर ब्रिगेड के नियमों के अनुसार यह बिल्डिंग न केवल अवैध है बल्कि जान माल के नुकसान की नजर से खतरनाक है। ऐसी बिल्डिंग में यदि कभी कोई हादसा हो गया तो हजारों जानें जाएंगी। तब इसके लिए उत्तरदायी कौन होगा ?इस यक्ष प्रश्न का जवाब कोई नहीं दे रहा है।
डीजी फायर ने अशोक कॉसमोस माॅल की फायर संबंधी एनओसी निरस्त कर शासन को आगाह भी कर दिया है। पर इसकी जानकारी मिलने के बावजूद आगरा प्रशासन इस माॅल में सील लगाकर इसका संचालन बंद करने की कार्रवाई नहीं कर रहा है।

(अशोक कॉसमोस मॉल में पार्किंग को पाटकर किया अतिक्रमण और बना लिया माॅल का प्लेटफार्म)

हाई कोर्ट में दायर है जनहित याचिका

आईटीआई कार्यकर्ता और अधिवक्ता उमाशंकर पटवा ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अशोक कॉसमोस माॅल के अवैध निर्माण को लेकर जनहित याचिका दायर की है। उनकी याचिका के आधार पर हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री के साथ ही आगरा प्रशासन, एडीए और फायर ब्रिगेड के अधिकारियों को तलब किया है। इस याचिका के दायर होने के बाद प्रशासन में हडकंप मचा है। मंडलायुक्त पहले अधिकारी हैं जो हाईकोर्ट में मामला पहुंचते ही माॅल संचालकों से दूरी बना रहे हैं। डीजी फायर ने अग्निशमन अनापत्ति प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया है। ऐसे में बिल्डिंग पर तुरंत सील लग जानी चाहिए,। पर प्रशासन यह नहीं कर रहा है।

नियमों को धता बताकर बना दी 35 मीटर ऊंची बिल्डिंग

आगरा विकास प्राधिकरण से यह भूखंड रंजना बंसल के नाम साल 1998 में लीज पर दिया है। इस भूखंड पर माॅल की कुल उंचाई 25 मीटर तक निर्माण अनुमान्य है पर माॅल का निर्माण 35 मीटर ऊंचाई तक कर दिया गया। इसके लिए बजीरपुरा साइट पर नियमानुसार जितना खाली स्थान छोडा जाना चाहिए था, नहीं छोडा गया। बिल्डिंग में कुछ छह मंजिल बननी थी बना ली गई आठ मंजिल।

हाई कोर्ट में मुख्यमंत्री तबल, महाधिवक्ता हुए हाजिर

हाई कोर्ट के न्यायधीश सुधीर कुमार अग्रवाल ने इस जनहित याचिका को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री सहित इस माॅस से जुडे सभी महकमों के अफसरों को बीते 25 मार्च को तलब किया था। न्यायालय की सख्ती के कारण उत्तर प्रदेश सरकार के महाधिवक्ता ने हाजिर होकर काउंटर दाखिल किया। उधर महानिदेशक अग्निशमन की ओर से हाई कोर्ट में जवाब दाखिल किया गया है कि माॅल की बिल्डिंग मानक के मुताबिक निर्धारित ऊंचाई से आगे नहीं बनाई जा सकती है। इसी आधार पर 31 मार्च को अग्निशमन की एनओसी निरस्त करते हुए एनबीसी के मानको का उल्लंघन मानकर विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिए हैं।

छूट रहे पसीने फिर भी अधिकारी दबाव में दे रहे साथ

हाई कोर्ट की तिरछी नजर और डीजी फायर द्वारा पुरानी एनओसी निरस्त कर उसका नवीनीकरण न किए जाने के बाद माॅल संचालिका से जुगलबंदी कर रहे प्रशासनिक अधिकारियों के अब पसीने छूट रहे हैं। अलबत्ता जिम्मेदार पदों पर बैठे कई अधिकारी अभी तक माॅल सील करने से बच रहे हैं। आगरा प्रशासन के एक जिम्मेदार अधिकारी ने बताया कि ब्रज क्षेत्र के एक कबीना मंत्री का उन पर दबाव है। उन्हें हाई कोर्ट से इस माॅल पर सील बंद करने के स्पष्ट आदेश मिलने का इंतजार है। इस बीच यदि हादसा हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा ? इस अधिकारी बगलें झांकने लगते हैं।

मीडिया मैनेज कर रही माॅल संचालिका

आगरा की मेन स्टीम मीडिया इस खबर को छापने से परहेज कर रही है। जबकि इस माॅल को लेकर कई सामाजिक संगठन और आरटीआई एक्टीविस्ट आवाज उठा रहे हैं।

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